दिल्ली एनसीआर ही नहीं देश के अधिकांश बड़े शहरों के लोग प्रदूषण हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जबकि स्वच्छ हवा में सांस लेना उनका मौलिक अधिकार है अधिकांश लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि कानून में इस बात का प्रावधान है कि यदि कोई प्रदूषण का शिकार होता है तो उसको सरकार से मुआवजा पाने का अधिकार है यहां हम बता रहे हैं आपको क्या अधिकार हैं ।
स्वच्छ हवा लोगों का मौलिक अधिकार
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ हवा को लोगों का मौलिक अधिकार घोषित किया गया है इसके तहत सरकार की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वह लोगों को स्वच्छ वातावरण और हवा मुहैया कराए संविधान के अलावा सर्वोच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने भी स्वच्छ हवा को लोगों का मौलिक अधिकार बताया है।
याचिका दाखिल कर मुआवजे की मांग
एनजीटी अधिनियम 2010 की धारा 15 में प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति यदि जल और वायु प्रदूषण से पीड़ित है तो वह मुआवजा पाने का अधिकार रखता है इसके लिए व्यक्ति एनजीटी में याचिका दाखिल कर सरकार से मुआवजा की मांग कर सकता है हालांकि उन्हें साबित करना होगा प्रदूषण की वजह से उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा है।
शिकायत करने का अधिकार
यदि आप कहीं भी अपने आसपास ऐसे किसी गतिविधि को होते देखते रहे तो इसकी शिकायत पुलिस नगर निगम एसडीएम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समिति में शिकायत कर सकते हैं प्रदूषण फैलाना दंडनीय अपराध है और दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को प्रदूषण संरक्षण कानून और अन्य कानून के तहत 3 साल तक कैद की सजा हो सकती है।
संविधान में स्वच्छ हवा को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किया गया लेकिन आज कई शहरों के लोग प्रदूषण हवा में सांस लेने को मजबूर हैं यह किसी एक की नहीं बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की विफलता को जाहिर करता है सरकार का काम कानून बनाना नहीं बल्कि कानून लागू करने का है संविधान और कानून में जो अधिकार दिए हैं वह कागजी नहीं रहने देना चाहिए सरकार को कानून और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए - सिताब अली चौधरी , पर्यावरण कार्यकर्ता और अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट ।

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