आदर्श गैस का दाब (Pressure of an Ideal Gas) :
मान लीजिए कि एक घनाकार पात्र है जिसकी प्रत्येक भुजा की लंबाई $L$ है और उसकी दीवारें पूर्णतः प्रत्यास्थ (perfectly elastic) हैं। इसमें $N$ अणु हैं, प्रत्येक का द्रव्यमान $m$ है। अणुओं की गतियाँ क्रमशः $C_1, C_2, \dots, C_n$ हैं। निर्देशांक अक्ष $X, Y, Z$ घन की भुजाओं के समानांतर हैं। वेग के अवयव क्रमशः $u, v, w$ हैं।
$C_1^2 = u_1^2 + v_1^2 + w_1^2 \quad ...(1)$
$C_2^2 = u_2^2 + v_2^2 + w_2^2 \quad ...(2) $
$C_n^2 = u_n^2 + v_n^2 + w_n^2 \quad ...(3)$
मानो कि कोई एक अणु किसी क्षण $C_1$ वेग से गति कर रहा है। यह अणु $X$-दिशा में गति करता हुआ वेग के $X$-घटक $u_1$ से पात्र की दीवार $abcd$ से टकराता है। टक्कर प्रत्यास्थ होने से अणु की गतिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है, केवल वेग की दिशा विपरीत हो जाती है। अतः दीवार $abcd$ से टकराने पर अणु का वेग घटक $u_1$ से परिवर्तित होकर $-u_1$ हो जाता है।
दीवार से टकराने से पूर्व अणु का $X$-दिशा में संवेग:
$p_{\text{initial}} = m u_1$
दीवार से टकराने के पश्चात अणु का $X$-दिशा में संवेग:
$p_{\text{final}} = -m u_1$
अतः एक टक्कर में अणु के $X$-दिशा में संवेग में परिवर्तन:
$\Delta p = p_{\text{final}} - p_{\text{initial}} = -m u_1 - (m u_1)$
$\Delta p= -2 m u_1$
संवेग संरक्षण के नियम से अणु व दीवार का कुल संवेग संरक्षित रहता है।
अतः एक टक्कर में दीवार $abcd$ का स्थानान्तरण संवेग:
$\Delta p = 2 m u_1$
अब यह अणु दीवार $abcd$ से टकराकर पुनः लौटता है,
फिर सामने वाली दीवार $oefg$ से टकराता है तथा फिर पुनः लौटकर दीवार $abcd$ से टकराता है।
इस प्रकार दीवार $abcd$ से पुनः टकराने के लिए अणु $2L$ दूरी तय करता है।
अणु को $2L$ दूरी तय करने में लगा समय:
$ \Delta t$= दूरी/चाल
$ \Delta t= \frac{2L}{u_1}$ सेकण्ड
न्यूटन के द्वितीय नियम से दीवार $abcd$ पर इस अणु द्वारा आरोपित बल:
$f = \frac{\Delta p}{\Delta t} = \frac{2 m u_1}{\tfrac{2L}{u_1}} = \frac{m u_1^2}{L}$
गैस के सभी अणुओं द्वारा दीवार $abcd$ पर आरोपित बल:
$F_x = \frac{m u_1^2}{L} + \frac{m u_2^2}{L} + \frac{m u_3^2}{L} + \dots + \frac{m u_n^2}{L}$
अतः
$F_x = \frac{m}{L} \left( u_1^2 + u_2^2 + u_3^2 + \dots + u_n^2 \right)$
$F_x = \frac{m}{L} \sum_{i=1}^{N} u_i^2 \tag{4}$
$P_x = \frac{F_x}{A} = \frac{F_x}{L^2} = \frac{m}{L^3} (u_1^2 + u_2^2 + \ldots + u_N^2)$
$= \frac{m}{L^3} \sum_{i=1}^{N} u_i^2 \tag{5}$
$P_y = \frac{F_y}{L^2} = \frac{m}{L^3} (v_1^2 + v_2^2 + \ldots + v_N^2)$
$= \frac{m}{L^3} \sum_{i=1}^{N} v_i^2 \tag{6}$
$P_z = \frac{F_z}{L^2} = \frac{m}{L^3} (w_1^2 + w_2^2 + \ldots + w_N^2)$
$= \frac{m}{L^3} \sum_{i=1}^{N} w_i^2 \tag{7}$
$P = \frac{P_x + P_y + P_z}{3}$
$P= \frac{m}{3L^3} \left[ \sum_{i=1}^{N} u_i^2 + \sum_{i=1}^{N} v_i^2 + \sum_{i=1}^{N} w_i^2 \right]$
$= \frac{m}{3L^3} \sum_{i=1}^{N} (u_i^2 + v_i^2 + w_i^2)$
$= \frac{m}{3L^3} \sum_{i=1}^{N} C_i^2$
$ = \frac{mNC^2}{3L^3}$
$\overline{C^2} = \frac{C_1^2 + C_2^2 + C_3^2 + \ldots + C_N^2}{N}$
इसे वर्ग माध्य वेग (Mean square velocity)कहते हैं।
यदि गैस का कुल द्रव्यमान $M$ हो तो
$M = mN$
अतः
$P = \frac{MC^2}{3L^3} = \frac{1}{3} \frac{M}{V} \overline{C^2} = \frac{1}{3} \rho \overline{C^2}$
जहाँ
$V = L^3$(पात्र का आयतन)
$\rho = \frac{M}{V}$ (गैस का घनत्व)
1 मोल के लिए
$M = M_A$(गैस का अणुभार)
$N = N_A$(आवोगाद्रो संख्या)
अतः 1 मोल गैस का दाब
$P = \frac{1}{3} \frac{M_A}{V} \overline{C^2}$
