दुनिया के ज्यादातर शहर 19वीं सदी में स्थानीय उत्सर्जन से जूझते थे मुख्य सड़कों पर घोड़ा गाड़ी चलती थी ऐसे में शहर बदबूदार लीदो से भरे रहते थे , जिन पर मक्खियां भिनभिनाती थी और बीमारी फैलती थी ।
फिर बीसवीं सदी के प्रारंभ में कारों के आगमन से घोड़ों की जगह उन vehicles ने ले ली जो greenhouse gas का उत्सर्जन करते थे। अब battery electrical vehicle, जिन्हें पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल माना जा रहा है आंतरिक दहन से चलने वाले इंजनों को चलन से बाहर कर रहे हैं।
कुछ आलोचकों के मुताबिक Battery के निर्माण तथा इनके इस्तेमाल व निस्तारण को देखते हुए electric vehicles , Non Electric Vehicle की तुलना में ज्यादा नुकसान देह है। पर अध्ययन से साबित हुआ है कि बेशक Non electric vehicles की तुलना में Electric vehicles के निर्माण के दौरान ज्यादा Greenhouse gas उत्सर्जन होता है पर इनके परिचालन के दौरान Carbon उत्सर्जन नहीं होता।
अध्ययन के मुताबिक अमेरिका में एक electrical sedan का उत्सर्जन Non electrical sedan का 35 Percentage electric suv का उत्सर्जन Non electric suv का 33 percentage और एक इलेक्ट्रिक पिकअप ट्रक का उत्सर्जन गैर पिकअप ट्रक का 35% ही होता है हालांकि इस अनुपात में फर्क हो सकता है electric vehicles से होने वाला उत्सर्जन इस पर भर करता है कि बैटरी चार्ज करने के लिए बिजली उत्पादन में ग्रीनहाउस गैस कितनी बनी है बिजली उत्पादन में नवीनीकरण ऊर्जा का उत्पादन कितना अधिक होगा greenhouse gas का उत्सर्जन उतना ही अधिक होगा अमेरिका के करीब 3000 Counties ( प्रशासनिक उप जिला) वैसे 78 में electric sedan का उत्सर्जन गैर इलेक्ट्रिक सेडान के उत्सर्जन से अधिक पाया गया है ऐसा इसलिए कि उन काउंटिज मैं कोयले से बिजली उत्पादन हुआ भारत में एक गैर लाभकारी संस्था आर एम आई द्वारा कराया गया अध्ययन बताता है कि वहां electric vehicles के परिचालन का पर्यावरणीय लाभ दिख रहा है बावजूद इसके कि वहां 75 फ़ीसदी बिजली कोयले से उत्पादित होती है विशेषज्ञों के मुताबिक Battery उत्पादन में अब पर्यावरण का ध्यान रखा जाता है Battery की आयु वाहन की आयु के बराबर होने लगी है तथा बिजली उत्पादन में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कट रहा है लिहाजा इलेक्ट्रिक वाहनों की आलोचना जल्दी ही अतीत की बात हो जाएगी।

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