रोजगार के लिए दर-ब-दर भटकने को मजबूर उत्तराखंड अतिथि शिक्षक - Param Himalaya - परम हिमालय

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Wednesday, May 27, 2026

रोजगार के लिए दर-ब-दर भटकने को मजबूर उत्तराखंड अतिथि शिक्षक

Uttarakhand guest teacher उत्तराखंड का अतिथि शिक्षक

देहरादून : उत्तराखंड का अतिथि शिक्षक वर्षों से पहाड़ के दुर्गम और अति-दुर्गम विद्यालयों में सेवा दे रहा है। सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और अल्प मानदेय के बावजूद उसने शिक्षा की लौ को बुझने नहीं दिया। लेकिन विडंबना देखिए — वही शिक्षक हर वर्ष 27 मई से 30 जून तथा 1 जनवरी से 14 जनवरी तक बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर होता है।

विद्यालय में आवश्यकता पड़ने पर अतिथि शिक्षक से हर जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जाती है — बच्चों के परिणाम से लेकर विद्यालय के हर छोटे-बड़े कार्य तक। लेकिन जब बात अधिकार, सम्मान और स्थायित्व की आती है, तब उसे केवल “अतिथि” और “अस्थायी” कहकर किनारे कर दिया जाता है।

यह केवल एक शिक्षक की समस्या नहीं है, बल्कि उसके पूरे परिवार के संघर्ष की कहानी है। अल्प मानदेय पर अपने बच्चों की पढ़ाई, भोजन और भविष्य का भार उठाने वाला अतिथि शिक्षक हर वर्ष असुरक्षा और बेरोजगारी की पीड़ा झेलता है।

दुखद यह भी है कि बिखरी हुई आवाज़ें और कमजोर नेतृत्व आज तक इस संघर्ष को मजबूत दिशा नहीं दे सके। अतिथि शिक्षक केवल रोजगार नहीं मांग रहा, वह अपने वर्षों के समर्पण, संघर्ष और सम्मान का अधिकार मांग रहा है।

अब समय आ गया है कि अतिथि शिक्षकों की पीड़ा को समझा जाए और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस एवं संवेदनशील निर्णय लिए जाएँ।

1 comment:

  1. Uttarakhand sarkar होश में आओ

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