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स्वागत गीत : अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम् (Ath Swagatam Shubh Swagatam)

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स्वागत गीत : अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम् (Ath Swagatam Shubh Swagatam)  अथ स्वागतं शुभ स्वागतम्  स्वागतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् । आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् ॥ ध्रु.॥ नित्य निरंतरता नवता मानवता समता ममता सारथि साथ मनोरथ का जो अनिवार नहीं थमता संकल्प अविजित अभिमतम् ॥ १॥ आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् ॥ कुसुमित नई कामनाएँ सुरभित नई साधनाएँ मैत्रीमात क्रीडांगन में प्रमुदित बन्धु भावनाएँ शाश्वत सुविकसित इति शुभम् ॥ २॥ आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् ॥

उत्तराखंड GK : कुली बेगार आन्दोलन का संपूर्ण इतिहास , पृष्ठभूमि , प्रथा का अंत

उत्तराखंड GK : कुली बेगार आन्दोलन का संपूर्ण इतिहास , पृष्ठभूमि , प्रथा का अंत  कुली बेगार प्रथा क्या थी कुली बेगार प्रथा उत्तराखंड में काफी पहले से मौजूद थी परंतु 1815 में अंग्रेजों का उत्तराखंड में अधिकार हो गया जिसके बाद कुली बेगार प्रथा के द्वारा उत्तराखंड के लोगों का अत्याचार भी बढ़ गया आम आदमी से कुली का काम बिना पारिश्रमिक दिये कराने को कुली बेगार (Kuli Begar) कहा जाता था, विभिन्न ग्रामों के प्रधानों का यह दायित्व होता था, कि वह एक निश्चित अवधि के लिये, निश्चित संख्या में कुली शासक वर्ग को उपलब्ध करायेगा। इस कार्य हेतु प्रधान , पटवारी या मालदार के पास बाकायदा एक रजिस्टर भी होता था, जिसमें सभी ग्राम वासियों के नाम लिखे होते थे और सभी को बारी-बारी यह काम करने के लिये बाध्य किया जाता था। यह तो घोषित बेगार था और इसके अतिरिक्त शासक वर्ग के भ्रमण के दौरान उनके खान-पान से लेकर हर ऐशो-आराम की सुविधायें भी आम आदमी को ही जुटानी पड़ती थी। कुली बेगार के प्रकार :  1. कुली उतार : जब गांव के लोग सड़कों पर उतरकर कुली काम करते थे तो इसे कुली उतार कहा जाता था । 2. कुली बेगार : जब कोई ...

व्याख्यान विधि (Lecture Method) क्या है ? इसके लाभ , सीमाएँ , उपयोग , गुण एवम दोष - Param Himalaya

व्याख्यान विधि (Lecture Method) क्या है ? इसके लाभ , सीमाएँ , उपयोग एवम गुण दोष - Param Himalaya व्याख्यान विधि (Lecture Method): हमारे विद्यालय में सबसे अधिक इस शिक्षण विधि का उपयोग किया जाता है। यह शिक्षण विधि शिक्षक केन्द्रित होती है इसमें विद्यार्थी निष्क्रिय श्रोता होता है। कक्षा में पूरा नियंत्रण शिक्षक का ही होता है। शिक्षक बिना किसी श्रव्य दृश्य सहायक सामग्री के इस्तेमाल के शिक्षण कार्य सम्पन्न करता है। इस प्रकार का शिक्षण बहुत नीरस, उबाऊ और एक तरफा होता है, जिसमें विद्यार्थी ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाता है। व्याख्यान विधि के लाभ (Advantages of Lecture Method)- 1. इसमें पाठ्य वस्तु कम समय में अधिक मात्रा में प्रस्तुत की जा सकती है। 2. यदि शिक्षक विधिवत् ढंग से उच्च स्तर के विद्यार्थियों के लिए इसके द्वारा शिक्षण कराता है तब यह बहुत प्रभावशाली होती है। 3. इस विधि में शिक्षक स्वतंत्र होकर अपने तरीके से शिक्षण कार्य करता है इसलिए यह विधि बहुत सुविधाजनक और आसान होती है। व्याख्यान विधि की सीमाएँ (Limitations of Lecture Method)- 1. इसमें विद्यार्थी की सहभागिता बिल्कुल नहीं होती है। ...

ह्यूरिस्टिक विधि (Heuristic Method) : गुण (Merits) , सीमाएं और कठिनाइयों (Limitations and Problems) अनुप्रयोग (Application)

ह्यूरिस्टिक विधि (Heuristic Method): यह बालकेन्द्रित शिक्षण विधि है, इसमें विद्यार्थी एक खोज कर्त्ता होता है, वह स्वयं खोज करके, निरीक्षण और प्रयोग करता है और सीखता है। इसमें शिक्षक ऐसी गतिविधियों को सम्मिलित करता है, जिसमें विद्यार्थी स्वतंत्र रहकर कार्य करता है, और सीखता है। ड्यूरिस्टिक शब्द ग्रीक भाषा से आया है जिसका अर्थ होता है खोज करना'। इसमें विद्यार्थी स्वयं खोज करने के लिए उत्साहित होता है। इस विधि में कक्षा के समक्ष कोई समस्या प्रस्तुत की जाती है जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी की जिम्मेदारी होती है विभिन्न स्त्रोतों से सूचनाएँ एकत्रित करके समस्या को जानना। उसको स्वतंत्रता होती है कि वे कक्षा में इधर-उधर जाकर अपने साथियों से समस्या पर चर्चा कर सकते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी को समस्या से सम्बन्धित एक कागज पर निर्देश लिखकर दिए जाते हैं। इसमें विद्यार्थी शिक्षक से बहुत कम दिशा-निर्देश प्राप्त करते हैं, जबकि शिक्षक सदैव सहायता करने के लिए तत्पर रहता है। इसमें विद्यार्थी के निरीक्षण, प्रयोग व पढ़ने की क्षमताओं का विकास होता है। वे सीखते हैं कि समस्या को कहाँ से हल करना चाहिए। तथा ऑक...

Notes : शैक्षिक तकनीकी ( Educational Technology ) - अर्थ, प्रकृति, प्रकार, आवश्यकता , उपयोग , घटक: nature, types, need and use

शैक्षिक तकनीकी ( Educational Technology ) - प्रकृति, प्रकार, आवश्यकता एवं उपयोग : nature, types, need and use :  शैक्षिक तकनीक का अर्थ जे०के० गालब्रेथ ने अपनी पुस्तक द न्यू इन्डस्ट्रियल स्टेट मे तकनीकी की दो मुख्य विशेषताये बतायी है वह है - 1. प्रयोगिक कार्यों मे वैज्ञानिक ज्ञान का क्रमबद्व प्रयोग और 2. प्रयोगिक कार्यों का भागों और उपभागों मे विभाजन शिक्षा के क्षेत्र मे कोई भी विषय जो इन दो विशेष्ताओं को रखता है शैक्षिक तकनीकी कहलाता है। शैक्षिक तकनीकी शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग है। यह सिर्फ कंप्यूटर या इंटरनेट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी तरह के औजार, उपकरण और तरीके शामिल हैं जो शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाते हैं। शैक्षिक तकनीकी की प्रकृति :  बहुमुखी : यह शिक्षण के हर स्तर पर लागू होती है, चाहे वो प्राथमिक स्कूल हो या उच्च शिक्षा संस्थान। विकासशील : यह लगातार बदलती रहती है, क्योंकि नई तकनीकें आती रहती हैं। व्यक्तिगत : यह हर छात्र की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार शिक्षण को अनुकूलित करने में मदद करती है। सक्रिय : यह छात्रों को सीखने की प...

शैक्षणिक मूल्यांकन: आवश्यकता, प्रकार एवं विधियाँ - Educational Evaluation: Need, Types and Methods - Param Himalaya

शैक्षणिक मूल्यांकन: आवश्यकता, प्रकार एवं विधियाँ Educational Evaluation: Need, Types and Methods - Param Himalaya शैक्षणिक मूल्यांकन शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिक्षार्थियों की प्रगति, उनके ज्ञान, कौशल और समझ का आकलन किया जाता है। शैक्षणिक मूल्यांकन की आवश्यकता क्यों है? शिक्षार्थियों की प्रगति का मापन: यह शिक्षक को यह जानने में मदद करता है कि छात्र किस हद तक सीख रहे हैं और क्या उन्हें अतिरिक्त मदद की आवश्यकता है। शिक्षण विधियों का मूल्यांकन: यह शिक्षक को यह समझने में मदद करता है कि कौन सी शिक्षण विधियां प्रभावी हैं और कौन सी नहीं। पाठ्यक्रम का मूल्यांकन: यह यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि पाठ्यक्रम उचित स्तर का है और शिक्षार्थियों की जरूरतों को पूरा करता है। अभिभावकों को सूचित करना: यह अभिभावकों को उनके बच्चों की प्रगति के बारे में सूचित करने में मदद करता है। संस्थागत सुधार: यह संस्था को अपने कार्यक्रमों में सुधार करने में मदद करता है। शैक्षणिक मूल्यांकन के प्रकार रचनात्मक मूल्यांकन: यह शिक्षण के दौरान किया जाता है और इसका उद्देश्...