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स्वागत गीत : अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम् (Ath Swagatam Shubh Swagatam)

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स्वागत गीत : अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम् (Ath Swagatam Shubh Swagatam)  अथ स्वागतं शुभ स्वागतम्  स्वागतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् । आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् ॥ ध्रु.॥ नित्य निरंतरता नवता मानवता समता ममता सारथि साथ मनोरथ का जो अनिवार नहीं थमता संकल्प अविजित अभिमतम् ॥ १॥ आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् ॥ कुसुमित नई कामनाएँ सुरभित नई साधनाएँ मैत्रीमात क्रीडांगन में प्रमुदित बन्धु भावनाएँ शाश्वत सुविकसित इति शुभम् ॥ २॥ आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् ॥

Full Explain: शुद्ध अथवा निज अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor) ,

शुद्ध अथवा निज अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor) परिभाषा: जिस अर्धचालक में किसी प्रकार की अशुद्धि (impurity) नहीं मिलाई जाती और जो पूर्णत: शुद्ध अवस्था में होता है, उसे शुद्ध अथवा निज (Intrinsic) अर्धचालक कहते हैं। उदाहरण: सिलिकॉन (Si- z=14) और जर्मेनियम (Ge- z=32) विशेषताएँ: 1. इसमें कोई अशुद्धि नहीं होती। 2. सिलिकॉन व जर्मेनियम के बाहरी कक्ष में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो पास–पास के परमाणुओं से सहसंयोजक (covalent) बंध बनाते हैं। 3. 0 K (शून्य केल्विन) पर यह पूर्णत: कुचालक (insulator) होता है। 4. जब तापमान बढ़ाया जाता है तो ऊष्मीय विक्षोभ (thermal agitation) के कारण कुछ सहसंयोजक बंध टूट जाते हैं। इलेक्ट्रॉन वैलेन्स बैंड से conduction band में चला जाता है। पीछे छोड़ा गया स्थान होल (hole) कहलाता है। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन–होल जोड़े (electron–hole pairs) उत्पन्न होते हैं। 5. अर्धचालक की चालकता इलेक्ट्रॉनों और होल्स दोनों से होती है और दोनों की संख्या बराबर रहती है।  $n_{e} = n_{h} = n_{i}$ जहां $n_{i}$ =  6. तापमान जितना बढ़ेगा, उतनी अधिक संख्या में इलेक्ट्रॉन–होल जोड़े बनेंगे और ...

Full Explain : अशुद्ध अथवा बाह्य अर्धचालक - दो प्रकार n - टाइप एवं p - टाइप अर्धचालक

अशुद्ध अथवा बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductors) :  निज (शुद्ध) अर्धचालकों की वैद्युत चालकता अति अल्प होती है परन्तु यदि किसी ऐसे पदार्थ की थोड़ी-सी मात्रा, जिसकी संयोजकता (valency) 5 अथवा 3 हो, शुद्ध जर्मेनियम (अथवा शुद्ध सिलिकॉन) क्रिस्टल में अपद्रव्य (impurity) के रूप में मिश्रित कर दें तो क्रिस्टल की चालकता काफ़ी बढ़ जाती है। मिश्रित करने की क्रिया को 'अपमिश्रण (doping)' कहते हैं। उदाहरणार्थ, $10^8$ जर्मेनियम परमाणुओं में 1 अपद्रव्य परमाणु मिश्रित कर देने पर, जर्मेनियम की चालकता 16 गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे अशुद्ध अर्धचालकों को 'बाह्य (extrinsic) अथवा 'अपद्रव्य (impurity) अथवा अपमिश्रित (doped) अर्धचालक कहते हैं। इन अर्धचालकों में मिश्रित किये जाने वाले अपद्रव्य की मात्रा को नियन्त्रित करके इच्छानुसार चालकता अर्जित की जा सकती है। बाह्य अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं: n-टाइप तथा p-टाइप (a) n-टाइप अर्धचालक (n-type Semiconductor): जब किसी जर्मेनियम (अथवा सिलिकॉन) क्रिस्टल में संयोजकता 5 वाला (pentavalent) अपद्रव्य परमाणु (जैसे आर्सेनिक, ऐण्टीमनी अथवा फॉस्फोरस) मिश्...

धातुओं, चालक तथा अर्धचालकों का वर्गीकरण : चालकता ,प्रतिरोधकता व ऊर्जा बैंड आरेख आधार पर Classification of Metals, Insulators and Semiconductors on the Basis of Conductivity, Resistivity and Energy Band Diagram)

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अध्याय – 14 : अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स : सामग्री, युक्तियाँ एवं सरल परिपथ धातुओं, चालक तथा अर्धचालकों का वर्गीकरण : चालकता ,प्रतिरोधकता व ऊर्जा बैंड आरेख आधार पर Classification of Metals, Insulators and Semiconductors on the Basis of Conductivity, Resistivity and Energy Band Diagram) धातुओं, चालक तथा अर्धचालकों का वर्गीकरण : चालकता या प्रतिरोधकता के आधार पर : विद्युत चालकता ($\sigma$) या प्रतिरोधकता  $\left( \rho = \dfrac{1}{\sigma} \right)$  के सापेक्ष मानों के आधार पर ठोसों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है :   1. धातु (Metals) :     इनकी प्रतिरोधकता बहुत कम होती है (अर्थात् चालकता बहुत अधिक होती है)।   $\rho \approx 10^{-2}/$ से $10^{-8} \Omega m$ $\sigma \approx 10^{2}$ से $10^{8} \, S m^{-1}$ 2. अर्धचालक (Semiconductors) :     इनकी प्रतिरोधकता और चालकता धातुओं और कुचालकों के बीच होती है।   $\rho \approx 10^{-5}$ से $10^{6} \, \Omega m$ $\sigma \approx 10^{5}$ से $10^{-6} \, S m^{-1}$ 3. कुचालक (Insulators) :     इन...

NCERT Solutions कक्षा 12 भौतिक विज्ञान अध्याय 13 नाभिक हिंदी में Class 12 Physics Chapter 13 Nuclei in hindi

NCERT Solutions कक्षा 12 भौतिक विज्ञान अध्याय 13 नाभिक हिंदी में Class 12 Physics Chapter 13 Nuclei in hindi

NCERT Solutions कक्षा 12 भौतिक विज्ञान अध्याय 12 परमाणु हिंदी में Class 12 Physics Chapter 12 Atom in hindi

NCERT Solutions कक्षा 12 भौतिक विज्ञान अध्याय 12 परमाणु हिंदी में Class 12 Physics Chapter 12 Atom in hindi

नाभिकीय विखंडन , नाभिकीय संलयन और तारों में ऊर्जा जनन , नियंत्रित ताप नाभिकीय संलयन - Nuclear Energy: Fission, Fusion, Stellar Energy Generation, and Controlled Thermonuclear Fusion"

नाभिकीय विखंडन , नाभिकीय संलयन और तारों में ऊर्जा जनन , नियंत्रित ताप नाभिकीय संलयन - Nuclear Energy: Fission, Fusion, Stellar Energy Generation, and Controlled Thermonuclear Fusion" नाभिकीय ऊर्जा  नाभिकीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों को एक साथ बाँधने के लिए चाहिए। वास्तव में यह ऊर्जा बंधन ऊर्जा (Binding Energy) होती है। जब अलग–अलग न्यूक्लियॉनों से एक नाभिक बनता है तो उसका वास्तविक द्रव्यमान अपेक्षित द्रव्यमान से कम होता है। यह कमी = द्रव्यमान क्षति (Mass Defect, Δm)। आइंस्टीन के समीकरण से, यह ऊर्जा में बदल जाती है: $E_b = \Delta m \, c^2/$ $\text{B.E./Nucleon} = \frac{E_b}{A}$ लोहे (Fe, A ≈ 56) और निकेल (Ni) के लिए यह सबसे अधिक है (~8.8 MeV)। छोटे नाभिकों में B.E./nucleon कम → वे संलयन द्वारा स्थिर होते हैं। बड़े नाभिकों (U, Pu) में B.E./nucleon भी कम → वे विखंडन द्वारा स्थिर होते हैं। ऊर्जा उत्पादन तभी संभव है जब किसी अभिक्रिया में बने नाभिकों का B.E./nucleon पहले से अधिक हो। इसका मतलब → हल्के नाभिकों का संलयन (fusion) → ऊर्जा निकलती है।...

द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा | प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा के साथ उदाहरण , Mass Defect and Binding Energy | Binding Energy per Nucleon with Example

द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा | प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा के साथ उदाहरण Mass Defect and Binding Energy | Binding Energy per Nucleon with Example द्रव्यमान क्षति एवं बंधन ऊर्जा :  1. द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) किसी परमाणु नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान, उसमें मौजूद प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों के योग से कम होता है।   इस अंतर को ही द्रव्यमान क्षति $(\Delta m)$ कहते हैं। $\Delta m = (Z m_p + N m_n) - M_n$ जहाँ,   $Z =$ प्रोटॉनों की संख्या $N =$ न्यूट्रॉनों की संख्या $m_p =$ प्रोटॉन का द्रव्यमान $m_n =$ न्यूट्रॉन का द्रव्यमान $M_n =$ नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान 2. बंधन ऊर्जा (Binding Energy) नाभिक को तोड़कर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन अलग करने के लिए जितनी ऊर्जा चाहिए, उसे बंधन ऊर्जा $(E_b)$ कहते हैं।   $E_b = \Delta m \, c^2$ या परमाणु द्रव्यमान इकाई में,   $E_b = \Delta m \times 931.5 \, \text{MeV}$ 3. प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा :  किसी नाभिक की स्थिरता जानने के लिए प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा निकाली जाती है।   $\frac{E...