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स्वागत गीत : अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम् (Ath Swagatam Shubh Swagatam)

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स्वागत गीत : अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम् (Ath Swagatam Shubh Swagatam)  अथ स्वागतं शुभ स्वागतम्  स्वागतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् । आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् ॥ ध्रु.॥ नित्य निरंतरता नवता मानवता समता ममता सारथि साथ मनोरथ का जो अनिवार नहीं थमता संकल्प अविजित अभिमतम् ॥ १॥ आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् ॥ कुसुमित नई कामनाएँ सुरभित नई साधनाएँ मैत्रीमात क्रीडांगन में प्रमुदित बन्धु भावनाएँ शाश्वत सुविकसित इति शुभम् ॥ २॥ आनंद मंगल मंगलम् । नित प्रियं भारत भारतम् । अथ स्वागतं शुभ स्वागतम् ॥

Lyrics - चलें चलें हम निशिदिन अविरत, चले चले हम सतत् चलें , Chale Chale hum Nishdin avirat Chale Chale hum satat chale

Lyrics - चलें चलें हम निशिदिन अविरत, चले चले हम सतत् चलें , Chale Chale hum Nishdin avirat Chale Chale hum satat chale  चलें चलें हम निशिदिन अविरत, चले चले हम सतत् चलें  कर्म करें हम निरलस पल-पल, दिनकर सम हम सदा जलें।।  सोते नर का भाग्य सुप्त है, जागे नर का भाग्य जागता  उठने पर वह झट से उठता, पग बढ़ते ही वह भी बढ़ता -  आप्त वचन यह ऋषि मुनियों का, नर है नर का भाग्य विधाता  पुरखों की यह सीख समझकर, कर्मलीन हों सदा चलें।।1।।  आर्य धर्म को पुनः प्राणमय, करने निकले घर से शंकर  केरल से केदारनाथ तक, घूमे गुमराहों पर जयकर  विचरे अचल वनांचल मरुथल, ऐक्य तत्व का भाव जगाकर  उस दिग्विजयी की गति लेकर, कर्म करें कर्मण्य बनें।।2।।  गाड़ी मेरा घर है कहकर, जिसने की दिन रात तपस्या  मै नहीं तू ही तू यह जपकर, जिसने की माँ की परिचर्या  जय ही जय की धुन से जिसने, पूरी की जीवन की यात्रा  उस माधव के अनुचर हम नित, काम करे अविराम चलें।।3।।

Lyrics - देश जागे देश जागे, मंत्र सब गुंजा रहे हैं , Desh Jaage Desh Jaage Mantra Sab Gunja rhe h

Lyrics - देश जागे देश जागे, मंत्र सब गुंजा रहे हैं , Desh Jaage Desh Jaage Mantra Sab Gunja rhe h देश जागे देश जागे, मंत्र सब गुंजा रहे हैं।  मातृमंदिर के पुजारी, एक स्वर में गा रहे हैं।।  जिसकी चिंगारी हृदय में प्रेरणा साहस जगा दे  और तन मन का सहजतम मोह भ्रम भय सब जला दे  उस अनोखी आग को सौ यज्ञ कर सुलगा रहे हैं  मातृमंदिर के पुजारी, एक स्वर में गा रहे हैं।।1।।  पथ कठिन हो या सरल हो चलने का समान मांगे तेज तम बलिदान पुलकित देश का सम्मान जागे  चिर विजय की कामना हर स्वस्थ्य मन अपना रहे हैं  मातृमंदिर के पुजारी, एक स्वर में गा रहे हैं।।2।।  शक्ति संचय से विकल जब दीनता का सहज लय हो  मातृसेवा में निहित जब देश का प्रत्येक जन हो  वे सुहाने सुखद पल प्रतिपल निकटतम आ रहे हैं  मातृमंदिर के पुजारी, एक स्वर में गा रहे हैं।।3।।

Lyrics - सोने जैसी माटी इस की अमृत जैसा पानी है , Sone jesi maati es ki amrit jesa pani he

Lyrics - सोने जैसी माटी इस की अमृत जैसा पानी है  , Sone jesi maati es ki amrit jesa pani he सोने जैसी माटी इस की अमृत जैसा पानी है  घर-घर में गाई जाती भारत की अमर कहानी है।  एक ओर है खड़ा हिमालय एक ओर सागर विशाल है  चरण पखारें गंगा सागर कश्मीर दैदिप्य भाल है।  है देवों की जन्म भूमि यह तपो भूमि कल्याणी है  सोने जैसी माटी इस की अमृत जैसा पानी है।।1।।  गंगा यमुना अति पावन धरती को स्वर्ग बनाती हैं  कण-कण में ये प्राण सींच कर जीवन को दुलराती हैं।  स्वर्ग से सुन्दर धरा हमारी सारे जग ने मानी है  सोने जैसी माटी इसकी अमृत जैसा पानी है।।2।।  भगत सिंह आज़ाद सरीखे भारत माँ के लाल यहाँ  इनके आगे अंग्रेंजों की गली कभी न दाल यहाँ  बलिदानी आदर्श है इनके इनकी धन्य जवानी है  सोने जैसी माटी इसकी अमृत जैसा पानी है।।3।।  सूरज सब से पहले आकर देता नया सवेरा है,  उड़े गगन में पंछी उनका यह उन्मुक्त बसेरा है  सब के सुख की करे कामना अपनी रीत पुरानी है  सोने जैसी माटी इसकी अमृत जैसा पानी है।।4।।

Lyrics - चलो जवानो, बढ़ो जवानों, माँ ने हमें पुकारा है, Chalo Jawano Badho Jawano Ma ne Hame pukara h

Lyrics - चलो जवानो, बढ़ो जवानों, माँ ने हमें पुकारा है, Chalo Jawano Badho Jawano Ma ne Hame pukara h चलो जवानो, बढ़ो जवानों, माँ ने हमें पुकारा है, दुश्मन ने ललकारा है।। राणा सांगा, शिव, प्रताप का विक्रम भूल नहीं जाना, भगतसिंह के अतुल त्याग को कभी न मन से बिसराना, झांसी की रानी का गौरव सकल देश में फैलाना, गुरु-पुत्रों के बलिदानों की अमर कथाएं दुहराना। बढ़ो-बढ़ो ओ सिंह सपूतों, हिमगिरि ने ललकारा है ।। 1 ।। तेरे होते सीमाओं पर दुश्मन न आने पाये, आ जाये तो वापस अपना शीश न ले जाने पाये, जिधर बढ़ा तूफाँ शरमाये, सागर-पर्वत झुक जाये, शीश जहां अर्पण हो जाये, वहां तीर्थ ही बन जाये, भारत माँ की लाज बचाना, पहला काम हमारा है ।। 2 ।। गंगा, यमुना, कावेरी की लहरें हमें बुलाती हैं, राम-कृष्ण की धरती ऊपर गीता-ज्ञान सुनाती है, उठो-उठो ज्यों पार्थ उठे, तुम वैरी को ललकार उठो, बढ़ो-बढ़ो, ओ पार्थ बढ़ो तुम, वैरी ना बचने पाये, भारत माँ की सेवा करना यह कर्तव्य हमारा है ।। 3 ।।

Lyrics - यह अमर शहीदों की धरती, बलिदान हुए लाखों जीवन , Yah Amar Shahido ki dharti Balidal hue lakho

Lyrics - यह अमर शहीदों की धरती, बलिदान हुए लाखों जीवन , Yah Amar Shahido ki dharti Balidal hue lakho यह अमर शहीदों की धरती, बलिदान हुए लाखों जीवन।  उनके बलिदानों को हम सब, शीश झुका कर करें नमन।।  गाँधी, पटेल, नेहरु, सुभाष, लाल, बाल और पाल विपिन।  कोटि चरण चल पड़े साथ, ले सत्य अहिंसा का सम्बल।।  उनके पथ पर हम बढ़े चलें, भारत होगा नंदन उपवन  शीश झुका कर करें नमन।।1।।  अपने इस देश की रक्षा हित, अशफाक, भगत, आज़ाद बनें।  इस देश पे मरने मिटने का, बिस्मिल सा मन में भाव भरें।।  रोशन सिंह जैसे वीर बनें, चमकायें, भारत भाग्य भुवन।  शीश झुका कर करें नमन।।2।।  पुरखों का मन में ध्यान धरें, राणा सांगा की शान अमर।    कुंवर सिंह अभिलाषी की, तात्या, नाना की शान अमर।।  उनकी आशा अभिलाषा को, हम करें पूर्ण देकर जीवन।  शीश झुका कर करें नमन।।3।।  जो हुए देश पर थे शहीद, उनका सुस्मित सम्मान करें।  हम भी बलि पथ पर बढ़े चलें इस अमर देश का मान करें।।  भारत के वीर-शहीदों का, हम करें, सदा शत-शत वन्दन।  शीश झुका कर करें नमन।।4।।...

Lyrics - न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है , Na yah samjho ki hindustan ki talwar soe he

Lyrics - न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है , Na yah samjho ki hindustan ki talwar soe he न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है।  जिसे सुनकर दहलती थी कभी छाती सिकन्दर की  जिसे सुन करके ‘कर’ से छूटती थी तेग़ बाबर की  जिसे सुन शत्रु की फौजें बिखरती थीं सिहरती थीं  विसर्जन की शरण ले डूबती नावें उभरती थीं  हुई नीली जिसकी चोट से आकाश की छाती  न यह समझो कि अब रण बांकुरी हुंकार सोई है।।1।।  फिरंगी से ज़रा पूछो कि हिन्दुस्तान कैसा है  कि हिन्दुस्तानियों के रोष का तूफान कैसा है  जरा पूछो भयंकर फांसियों के लाल तख्तों से  बसा है नाग बांबी में मगर ओ छेड़ने वालों  न यह समझो कि जीवित नाग की फुंकार सोई है।।2।।  न सीमा का हमारे देश ने विस्तार चाहा है  किसी के स्वर्ण पर हमने नहीं अधिकार चाहा है  मगर यह बात कहने में चूके हैं न चूकेंगे   लहू देंगे मगर इस देश की मिटटी नहीं देंगे  किसी लोलुप नजर ने यदि हमारी मुक्ति को देखा  उठेगी तब-प्रलय की आग जिस पर क्षार सोई है।।3।।

Lyrics - संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो, Sangathan gadhe chalo , Supath par badhe chalo

Lyrics - संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो, Sangathan gadhe chalo , Supath par badhe chalo संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो,  भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो।।  युग के साथ मिल के सब, कदम बढ़ाना सीख लो,  एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो, भूल कर भी सुख में जाति, पंथ की न बात हो,  भाषा प्रांत के लिए, कभी न रक्तपात हो,   फूट का भरा घड़ा है, फोड़ कर बढ़े चलो।।  भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो।।  आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार,  हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार,  कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम,  देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम,  देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो।।  भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किये चलो।।